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Karo Ya Maro ka nara kisne diya tha? महात्मा गांधी और भारत छोड़ो आंदोलन में इसका महत्व

करो या मरो का नारा किसने दिया?

“करो या मरो” का नारा महात्मा गांधी ने दिया था। यह नारा 1942 में चलाए गए भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement) के दौरान दिया गया। महात्मा गांधी ने इस नारे के जरिए जनता को स्पष्ट संदेश दिया कि स्वतंत्रता की लड़ाई में अब आधे-अधूरे प्रयास नहीं चलेगे, बल्कि पूरे मन और शक्ति से ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष करना होगा। गांधीजी ने “करो या मरो” के नारे से भारत के आम लोगों को एकजुट होकर संघर्ष करने के लिए प्रेरित किया। इस नारे का उद्देश्य था वीरता और साहस को प्रोत्साहित करके उन्हें स्वतंत्रता संग्राम में भागीदार बनाना और देश की आजादी के लिए सक्रिय योगदान देना। गांधीजी ने इस नारे के माध्यम से भारतीय जनता को अभियानों, सत्याग्रह, और अनशन जैसे आन्दोलनों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया और उन्हें अपने देश के स्वतंत्रता के लिए प्रतिबद्ध किया। गांधीजी के नारे ने भारतीय जनता को आत्मनिर्भरता, विश्वास, और सामर्थ्य का अनुभव कराया और उन्हें एक जुट होकर अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया।

इस नारे ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भारतीय जनता का हृदय जीत लिया था और इसके माध्यम से लोगों का उत्साह बढ़ाकर देश की आजादी की लड़ाई में भागीदारी को बढ़ावा दिया गया था। इस नारे ने वीरता और बलिदान के भाव को प्रतिष्ठान दिया और लोगों को देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने के लिए प्रेरित किया।

करो या मरो का नारा किस साल दिया गया था?

इस नारे का ऐतिहासिक वर्ष 1942 है। यह उस समय की परिस्थितियों का परिणाम था जब ब्रिटिश सरकार ने भारत पर अपने नियंत्रण को और सख्त कर दिया था। गांधीजी ने जनता को प्रोत्साहित किया कि या तो देश को आज़ाद करो या इस लक्ष्य के लिए सर्वोच्च बलिदान देने को तैयार रहो।

करो या मरो का नारा क्यों महत्वपूर्ण था?

यह नारा केवल शब्दों का समूह नहीं था, बल्कि भारतीय जनता के साहस, आत्मबल और बलिदान की भावना का प्रतीक बन गया। इस नारे ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भारतीय जनता का हृदय जीत लिया था और इसके माध्यम से लोगों का उत्साह बढ़ाकर देश की आजादी की लड़ाई में भागीदारी को बढ़ावा दिया गया था। इस नारे ने वीरता और बलिदान के भाव को प्रतिष्ठान दिया और लोगों को देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने के लिए प्रेरित किया।

  • इस नारे ने लोगों के मन से डर हटाया।
  • युवाओं, किसानों, मजदूरों और महिलाओं को आंदोलन में भाग लेने के लिए प्रेरित किया।
  • पूरे देश में सत्याग्रह, हड़तालें और विरोध प्रदर्शन तेज हो गए।

करो या मरो के प्रभाव क्या थे?

महात्मा गांधी के इस नारे ने स्वतंत्रता संग्राम में निर्णायक मोड़ लाया। इसके प्रभाव से:

  • जन-आंदोलन देशभर में फैल गया।
  • भारतीय जनता में एकजुटता और साहस की भावना बढ़ी।
  • 1947 में भारत को आज़ादी दिलाने की प्रक्रिया में इस नारे ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

“karo ya maro ka nara kisne diya tha” अक्सर ये प्रश्न SSC, State PSC और UPSC जैसी परीक्षाओं के GA सेक्शन में पूछे जाते हैं।

तथ्यविवरण
नाराकरो या मरो
नारा देने वालेमहात्मा गांधी
आंदोलनभारत छोड़ो आंदोलन
वर्ष1942

महात्मा गांधी कौन थे और उनके प्रमुख सिद्धांत क्या थे?

महात्मा गांधी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेता थे। उन्हें बापू (Bapu) के नाम से भी जाना जाता है। गांधीजी का जीवन और विचार आज भी प्रेरणा का स्रोत हैं।

श्रेणीविवरण
जीवन के मुख्य तथ्यजन्म: 2 अक्टूबर, 1869, पोरबंदर, गुजरातपदनाम: महात्मा गांधी, बापूभूमिका: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेता, अहिंसा और सत्याग्रह के प्रचारक
अहिंसा (Non-Violence)किसी से हिंसा न करना और किसी को हिंसा के लिए उकसाने से रोकनास्वतंत्रता आंदोलन में अहिंसा को सबसे शक्तिशाली हथियार के रूप में प्रयोग करना
सत्याग्रह (Satyagraha)अर्थ: “सत्य के प्रति अधिकार की लड़ाई”बिना हिंसा के अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करनाअंग्रेजों को अन्याय के प्रति सचेत करना
स्वदेशी (Swadeshi)अर्थ: अपने देश का समर्थन करनाभारतीय उद्योग, कला और शिक्षा को बढ़ावा देनाविदेशी वस्त्रों के बजाय भारतीय वस्त्र और उत्पादों का उपयोग
योगदान और प्रभावभारतीय जनता को स्वतंत्रता की दिशा में एकजुट करनालोगों को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने के लिए प्रेरित करनाधार्मिकता और अहिंसा की विचारधारा ने उन्हें विश्वभर में सम्मानित और यादगार बनाया

FAQs

Q1. करो या मरो नारा किसने दिया था?

Ans. गांधीजी ने करो या मरो नारा किसने दिया था

Q2. करो या मरो का नारा कब दिया गया था?

Ans. 8 अगस्त 1942

Q3. गांधीजी के प्रमुख सिद्धांत क्या थे?

Ans. 1. अहिंसा (Non-Violence): किसी से हिंसा न करना और आंदोलन में अहिंसा का पालन करना।
2. सत्याग्रह (Satyagraha): बिना हिंसा के अपने अधिकारों की लड़ाई।
3. स्वदेशी (Swadeshi): देश के उत्पादों और उद्योगों का समर्थन करना।

Q4. “करो या मरो” नारे का उद्देश्य क्या था?

Ans. इस नारे का उद्देश्य भारतीय जनता को ब्रिटिश शासन के खिलाफ अंतिम और निर्णायक संघर्ष के लिए प्रेरित करना और उन्हें स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भागीदार बनाना था।

6. इस नारे का प्रभाव क्या पड़ा?

Ans. 1. जनता में साहस और आत्मबल बढ़ा।
2. छात्र, किसान, मजदूर और महिलाएँ आंदोलन में शामिल हुए।
3. स्वतंत्रता की लड़ाई में जनता की भागीदारी बढ़ी और 1947 में आज़ादी हासिल हुई।



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