CAIIB सिलेबस 2026, ABM, BRBL, ABFM, BFM और Elective पेपर्स का पूरा विवरण
भारतीय बैंकिंग और वित्त संस्थान (IIBF) बैंकिंग पेशेवरों को उनके करियर में आगे बढ़ने में सहायता करने के लिए CAIIB 2026 परीक्षा आयोजित करता है। इस परीक्षा में पाँच पेपर शामिल हैं 4 अनिवार्य और 1 वैकल्पिक, जिसे उम्मीदवार अपनी रुचि और विशेषज्ञता के आधार पर चुन सकते हैं। अपनी तैयारी शुरू करने से पहले, उम्मीदवारों के लिए सभी पाँचों पेपरों के संपूर्ण पाठ्यक्रम की समीक्षा करना महत्वपूर्ण है।
इस ब्लॉग में, हमने उम्मीदवारों को प्रभावी ढंग से योजना बनाने और तैयारी करने में मदद करने के लिए अनिवार्य और वैकल्पिक दोनों पेपरों के लिए विस्तृत विषय-वार जानकारी और परीक्षा तिथियों सहित पूर्ण CAIIB 2026 पाठ्यक्रम प्रदान किया है।
CAIIB 2026 परीक्षा के तहत कौन से विषय शामिल हैं?
CAIIB परीक्षा में कुल 5 पेपर होते हैं, जिनमें 4 अनिवार्य पेपर (ABM, BFM, ABFM, और BRBL) और उम्मीदवार की पसंद के आधार पर एक वैकल्पिक पेपर शामिल है। पेपरों का विवरण इस प्रकार है:
| पेपर का प्रकार | विवरण |
| अनिवार्य पेपर | उन्नत बैंक प्रबंधन (ABM) बैंक वित्तीय प्रबंधन (BFM) उन्नत व्यवसाय और वित्तीय प्रबंधन (ABFM) बैंकिंग विनियम और व्यावसायिक कानून (BRBL) |
| वैकल्पिक पेपर (कोई एक चुनें) | ग्रामीण बैंकिंग मानव संसाधन प्रबंधन सूचना प्रौद्योगिकी और डिजिटल बैंकिंग जोखिम प्रबंधन केंद्रीय बैंकिंग |
CAIIB परीक्षा का पाठ्यक्रम (Syllabus) क्या है?
CAIIB 2026 पाठ्यक्रम में 5 पेपर शामिल हैं, जिनमें 4 अनिवार्य और 1 वैकल्पिक पेपर है। पाठ्यक्रम का विस्तृत विवरण नीचे दिया गया है:
| पेपर का नाम | मुख्य फोकस क्षेत्र |
| Advanced Bank Management (ABM) | आर्थिक विश्लेषण, व्यावसायिक गणित, मानव संसाधन प्रबंधन, और क्रेडिट प्रबंधन। |
| Bank Financial Management (BFM) | अंतर्राष्ट्रीय बैंकिंग, जोखिम प्रबंधन, ट्रेजरी प्रबंधन, और बैलेंस शीट प्रबंधन। |
| Advanced Business & Financial Management (ABFM) | व्यावसायिक रणनीति, नेतृत्व और नैतिकता, वित्तीय प्रबंधन, और मूल्यांकन एवं विलय। |
| Banking Regulations & Business Laws (BRBL) | विनियम और अनुपालन, महत्वपूर्ण अधिनियम, वाणिज्यिक कानून, और बैंकिंग के लिए व्यावसायिक कानून और विनियम। |
CAIIB वैकल्पिक पेपर (पसंद आधारित) पाठ्यक्रम
CAIIB के लिए कुछ वैकल्पिक पेपर भी हैं। हमने नीचे वैकल्पिक पेपरों के लिए विस्तृत CAIIB पाठ्यक्रम का उल्लेख किया है:
| वैकल्पिक पेपर | मॉड्यूल |
| CAIIB Elective Paper 1: Rural Banking | मॉड्यूल A: ग्रामीण भारत मॉड्यूल B: ग्रामीण विकास का वित्तपोषण मॉड्यूल C: प्राथमिकता क्षेत्र वित्तपोषण और सरकारी पहल मॉड्यूल D: ग्रामीण बैंकिंग में समस्याएं और संभावनाएं |
| CAIIB Elective Paper 2: HRM | मॉड्यूल A: मानव संसाधन प्रबंधन मॉड्यूल B: एक मानव संसाधन रणनीति बनाना मॉड्यूल C: प्रेरणा, प्रशिक्षण और कौशल विकास मॉड्यूल D: कार्मिक प्रबंधन और औद्योगिक संबंध मॉड्यूल E: HRM में उभरता परिदृश्य |
| CAIIB Elective Paper 3: IT & Digital Banking | मॉड्यूल A: सूचना प्रौद्योगिकी का परिचय मॉड्यूल B: सिस्टम और डिजाइन मॉड्यूल C: बैंकिंग प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग और डिजिटल बैंकिंग मॉड्यूल D: सूचना प्रणाली सुरक्षा नियंत्रण और ऑडिट |
| CAIIB Elective Paper 4: Risk Management | मॉड्यूल A: जोखिम और जोखिम प्रबंधन ढांचा मॉड्यूल B: क्रेडिट जोखिम मॉड्यूल C: बाजार जोखिम मॉड्यूल D: परिचालन जोखिम मॉड्यूल E: बेसल और RBI दिशानिर्देश मॉड्यूल F: डेरिवेटिव और जोखिम प्रबंधन |
| CAIIB Elective Paper 5: Central Banking | मॉड्यूल A: केंद्रीय बैंक का तर्क और कार्य मॉड्यूल B: भारत में केंद्रीय बैंकिंग मॉड्यूल C: मौद्रिक और क्रेडिट नीतियां मॉड्यूल D: विदेशी मुद्रा भंडार और भारतीय वित्तीय बाजार मॉड्यूल E: विनियमन, पर्यवेक्षण और वित्तीय स्थिरता मॉड्यूल F: NBFCs और प्राथमिक डीलर परिशिष्ट (Appendix) |
CAIIB वैकल्पिक पेपर चुनने के लिए किन प्रमुख दिशानिर्देशों का पालन किया जाना चाहिए?
CAIIB 2026 परीक्षा उम्मीदवारों को चार अनिवार्य पेपरों के अलावा एक वैकल्पिक पेपर चुनने का लचीलापन प्रदान करती है। यह विकल्प पेशेवरों को उनकी नौकरी की भूमिका, विशेषज्ञता के क्षेत्र या भविष्य की करियर आकांक्षाओं के साथ अपनी परीक्षा की तैयारी को जोड़ने की अनुमति देता है।
- छूट (Exemptions): किसी भी विषय के लिए कोई छूट नहीं दी जाती है, भले ही उम्मीदवारों के पास उच्च योग्यता हो।
- वैकल्पिक चयन: उम्मीदवारों को अपने वर्तमान कार्य प्रोफाइल या दीर्घकालिक करियर हितों के आधार पर एक वैकल्पिक विषय चुनना चाहिए।
- सिफारिश: वर्तमान भूमिका से जुड़े एक वैकल्पिक विषय को चुनने से बेहतर समझ, सुचारू तैयारी और कौशल वृद्धि सुनिश्चित होती है।
- लचीलापन: उम्मीदवारों के पास यदि आवश्यक हो तो भविष्य के प्रयासों में अपना वैकल्पिक पेपर बदलने का विकल्प होता है।
CAIIB परीक्षा पैटर्न क्या है?
IIBF द्वारा निर्धारित CAIIB परीक्षा पैटर्न में कुल पांच पेपर शामिल हैं—चार अनिवार्य पेपर (ABM, BFM, ABFM, और BRBL), जिनमें से प्रत्येक 100 अंकों के लिए 100 प्रश्नों के साथ 2 घंटे की अवधि के लिए अलग से आयोजित किया जाता है। एक वैकल्पिक पेपर भी 100 अंकों के लिए 100 प्रश्नों के साथ 2 घंटे की अवधि के लिए आयोजित किया जाता है।
| पेपर का नाम | कुल अंक | परीक्षा अवधि | उत्तीर्ण अंक |
| Advanced Bank Management (ABM) | 100 | 2 घंटे | 50 (या 50% कुल औसत के साथ 45) |
| Bank Financial Management (BFM) | 100 | 2 घंटे | 50 (या 50% कुल औसत के साथ 45) |
| Advanced Business & Financial Mgmt (ABFM) | 100 | 2 घंटे | 50 (या 50% कुल औसत के साथ 45) |
| Banking Regulations & Business Laws (BRBL) | 100 | 2 घंटे | 50 (या 50% कुल औसत के साथ 45) |
| Elective Paper (Any One) | 100 | 2 घंटे | 50 (या 50% कुल औसत के साथ 45) |
CAIIB 2026 परीक्षा के लिए अंकन योजना (Marking Scheme) क्या है?
Certified Associate of Indian Institute of Bankers (CAIIB) परीक्षा, IIBF के दिशानिर्देशों के अनुसार निर्धारित अंकन योजना (Marking Scheme) का पालन करती है। नीचे इसका विस्तृत विवरण दिया गया है:
- कुल पेपर: 5 (4 अनिवार्य + 1 वैकल्पिक)
- प्रति पेपर कुल अंक: 100 अंक
- प्रश्नों की संख्या: 100 (वस्तुनिष्ठ प्रकार)
- अंकन प्रणाली: प्रति सही उत्तर पर 1 अंक
- नेगेटिव मार्किंग: कोई नेगेटिव मार्किंग नहीं
- परीक्षा अवधि: 2 घंटे (120 मिनट) प्रति पेपर
CAIIB ABM पाठ्यक्रम के तहत कौन से विषय शामिल हैं?
CAIIB उन्नत बैंक प्रबंधन (Advanced Bank Management) पाठ्यक्रम चार मॉड्यूल में विभाजित है: मॉड्यूल A: सांख्यिकी (Statistics), मॉड्यूल B: मानव संसाधन प्रबंधन (Human Resource Management), मॉड्यूल C: क्रेडिट प्रबंधन (Credit Management), और मॉड्यूल D: बैंकों में अनुपालन और कॉर्पोरेट गवर्नेंस (Compliance in Banks & Corporate Governance)। पाठ्यक्रम के अंतर्गत उप-विषयों का विवरण इस प्रकार है:
| मॉड्यूल | इकाई / उप-विषय | विवरण (सरल शब्द) |
| मॉड्यूल A: सांख्यिकी (Statistics) | सांख्यिकी की मूल बातें | अर्थ, महत्व, कार्य, सीमाएं, डेटा संग्रह, वर्गीकरण, सारणीकरण, आवृत्ति वितरण |
| नमूना तकनीक (Sampling Techniques) | रैंडम सैंपलिंग, सामान्य और गैर-सामान्य आबादी, सैंपलिंग वितरण, सेंट्रल लिमिट थ्योरम, परिमित जनसंख्या गुणक | |
| केंद्रीय प्रवृत्ति और फैलाव के उपाय | अंकगणितीय माध्य, संयुक्त माध्य, ज्यामितीय माध्य, हार्मोनिक माध्य, माध्यिका, चतुर्थक, बहुलक, सीमा, चतुर्थक विचलन, मानक विचलन, भिन्नता का गुणांक, तिरछापन (Skewness), कर्टोसिस | |
| सहसंबंध और प्रतिगमन (Correlation & Regression) | स्कैटर आरेख, सहसंबंध, प्रतिगमन, अनुमान की मानक त्रुटि | |
| समय श्रृंखला (Time Series) | समय श्रृंखला में बदलाव (रुझान, चक्रीय, मौसमी, अनियमित), पूर्वानुमान तकनीक | |
| प्रायिकता सिद्धांत (Probability Theory) | प्रायिकता परिभाषा, सशर्त प्रायिकता, रैंडम वेरिएबल, प्रायिकता वितरण (द्विपद, पॉइसन, सामान्य), अपेक्षा और मानक विचलन, क्रेडिट जोखिम, वैल्यू एट रिस्क (VaR), विकल्प मूल्यांकन | |
| अनुमान (Estimation) | एस्टिमेटर और अनुमान, बिंदु अनुमान, अंतराल अनुमान, माध्य और अनुपात के लिए विश्वास अंतराल (बड़े नमूने) | |
| रैखिक प्रोग्रामिंग (Linear Programming) | ग्राफिक विधि, सिम्प्लेक्स विधि | |
| सिमुलेशन (Simulation) | सिमुलेशन के तरीके और अभ्यास | |
| मॉड्यूल B: मानव संसाधन प्रबंधन (HRM) | HRM के मूल सिद्धांत | HRM बनाम HRD, संरचना और कार्य, HR पेशेवरों की भूमिका, रणनीतिक HRM, भारत में HR का विकास |
| मानव संसाधन विकास (HRD) | HRD उप-प्रणालियां, सीखना और विकास, दृष्टिकोण निर्माण, करियर योजना, आत्म-विकास, प्रतिभा प्रबंधन, उत्तराधिकार योजना | |
| संगठनों में मानव व्यवहार | कर्मचारी व्यवहार, व्यक्तिगत अंतर, कार्यस्थल विविधता, लिंग मुद्दे, प्रेरणा सिद्धांत और व्यावहारिक उपयोग, भूमिका विश्लेषण | |
| कर्मचारी फीडबैक और पुरस्कार | फीडबैक प्रणाली, इनाम और मुआवजा प्रणाली | |
| प्रदर्शन प्रबंधन | मूल्यांकन के तरीके, समीक्षा और फीडबैक, परामर्श, योग्यता मैपिंग, मूल्यांकन केंद्र, व्यवहारिक घटना साक्षात्कार (BEI) | |
| संघर्ष प्रबंधन और बातचीत | अर्थ, विशेषताएं, प्रकार, कारण, संघर्ष के चरण, संघर्ष समाधान, बातचीत कौशल | |
| HR और प्रौद्योगिकी | HR में IT, HRIS, HRMS, e-HRM, HR अनुसंधान, ज्ञान प्रबंधन, प्रशिक्षण में प्रौद्योगिकी, HR एनालिटिक्स | |
| मॉड्यूल C: क्रेडिट प्रबंधन (Credit Management) | क्रेडिट का अवलोकन | महत्व, भारत में इतिहास, क्रेडिट के सिद्धांत, उधारकर्ताओं और क्रेडिट के प्रकार, RBI दिशानिर्देश |
| वित्तीय विवरण विश्लेषण | बैलेंस शीट, P&L, कैश फ्लो, फंड फ्लो, अनुमानित FS, बैंकर्स के लिए FS का पुनर्गठन, लेखा मानक, क्रिएटिव अकाउंटिंग, संबंधित पक्ष लेनदेन, विश्लेषण की तकनीकें | |
| कार्यशील पूंजी वित्त | अवधारणा, चक्र, तरलता अनुपात, मूल्यांकन के तरीके, IT/सॉफ्टवेयर उद्योग वित्त, बिल/प्राप्य वित्त, RBI दिशानिर्देश, TReDS, गैर-फंड आधारित सीमाएं | |
| सावधि ऋण और परियोजना वित्त | सावधि ऋण, परियोजना मूल्यांकन, DPGs, बुनियादी ढांचा वित्तपोषण | |
| क्रेडिट वितरण और प्रसंस्करण | दस्तावेजीकरण, गारंटी, प्रतिभूतियों पर शुल्क, ऋण संवितरण, कंसोर्टियम/मल्टीपल बैंकिंग, सिंडिकेटेड ऋण, स्ट्रेट-थ्रू प्रोसेसिंग | |
| क्रेडिट निगरानी और नियंत्रण | उपकरण, ऋण समीक्षा तंत्र (LRM) | |
| क्रेडिट जोखिम और क्रेडिट रेटिंग | अर्थ, कारक, शमन (Mitigation), आंतरिक और बाहरी रेटिंग, कार्यप्रणाली, क्रेडिट डेरिवेटिव, RBI दिशानिर्देश, क्रेडिट सूचना प्रणाली | |
| पुनर्गठन और वसूली | NPAs, तनावग्रस्त संपत्तियां, जानबूझकर चूक करने वाले, गैर-सहकारी उधारकर्ता, RBI दिशानिर्देश, पुनर्गठन विकल्प, संपत्तियों की बिक्री | |
| दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC) 2016 | परिभाषा, प्रयोज्यता, कानूनी प्रावधान, कॉर्पोरेट दिवाला समाधान, परिसमापन, MSMEs के लिए प्री-पैक | |
| मॉड्यूल D: अनुपालन और कॉर्पोरेट गवर्नेंस | बैंकों में अनुपालन | अनुपालन नीति, सिद्धांत, प्रक्रिया, कार्यक्रम, मुख्य अनुपालन अधिकारी (CCO) की भूमिका |
| अनुपालन ऑडिट | जोखिम आधारित आंतरिक ऑडिट, निगरानी, रिपोर्टिंग, SEBI लिस्टिंग खुलासे, लेखा मानक | |
| अनुपालन के लिए शासन संरचना | बोर्ड और वरिष्ठ प्रबंधन की भूमिका, कॉर्पोरेट और क्षेत्रीय स्तर पर अनुपालन, आंतरिक नियंत्रण का महत्व | |
| अनुपालन जोखिमों के लिए ढांचा | अनुपालन मुद्दे, जोखिम, अंतर्निहित और नियंत्रण जोखिम, ऑडिट कार्यक्रम, ऋण समीक्षा/क्रेडिट ऑडिट, अच्छे अनुपालन अभ्यास | |
| अनुपालन संस्कृति और GRC | अनुपालन संस्कृति का निर्माण, GRC ढांचा, लाभ, व्हिसलब्लोअर नीति, अनुपालन विफलता के कारण | |
| NBFCs में अनुपालन | स्केल-आधारित विनियमन, अनुपालन ढांचा और NBFC-UL और NBFC-ML में CCO की भूमिका | |
| बैंकों में धोखाधड़ी और सतर्कता | धोखाधड़ी और जालसाजी का अर्थ, बैंक और साइबर धोखाधड़ी के प्रकार, रिपोर्टिंग प्रणाली, सतर्कता कार्य, RBI दिशानिर्देश (निजी और विदेशी बैंक) |
CAIIB BFM पाठ्यक्रम के तहत कौन से विषय शामिल हैं?
CAIIB बैंक वित्तीय प्रबंधन (Bank Financial Management) पाठ्यक्रम चार मॉड्यूल में संरचित है: मॉड्यूल A: अंतर्राष्ट्रीय बैंकिंग (International Banking), मॉड्यूल B: जोखिम प्रबंधन (Risk Management), मॉड्यूल C: ट्रेजरी प्रबंधन (Treasury Management), और मॉड्यूल D: बैलेंस शीट प्रबंधन (Balance Sheet Management)। पाठ्यक्रम के अंतर्गत उप-विषयों का विवरण इस प्रकार है:
| मॉड्यूल | इकाई / उप-विषय | विवरण (सरल शब्द) |
| मॉड्यूल A: अंतर्राष्ट्रीय बैंकिंग | विनिमय दरें और विदेशी मुद्रा व्यापार | विदेशी मुद्रा का अर्थ, विदेशी मुद्रा बाजार, विनिमय दरों को प्रभावित करने वाले कारक, विनिमय दर तंत्र, विदेशी मुद्रा डीलिंग रूम, डेरिवेटिव, RBI/FEDAI दिशानिर्देश, विदेशी मुद्रा अंकगणित (अवधारणाएं और उदाहरण) |
| उदारीकृत प्रेषण योजना (LRS) और प्रेषण | पूंजी बनाम चालू खाता लेनदेन, FEMA प्रावधान, अनुमत और गैर-अनुमत प्रेषण, परिचालन दिशानिर्देश, TCS, LRS के तहत रिपोर्टिंग | |
| प्रतिनिधि बैंकिंग और NRI खाते | प्रतिनिधि बैंकिंग सेवाएं, Nostro/Vostro/Loro खाते, SWIFT, CHIPS, CHAPS, RTGS, NRI बैंकिंग – रुपया और FC खाते, NRI को ऋण और सुविधाएं | |
| दस्तावेजी साख पत्र (LCs) | परिभाषा, प्रकार, संचालन, UCP 600, पार्टियों के अधिकार और उत्तरदायित्व, दस्तावेजों की जांच, क्रिस्टलीकरण, सुरक्षा उपाय, जोखिम, स्टैंडबाय LC, URR-725, ISBP 745, इनकोटर्म्स, केस स्टडीज | |
| निर्यातकों और आयातकों के लिए सुविधाएं | RBI/विनिमय दिशानिर्देश, निर्यात वित्त, गोल्ड कार्ड योजना, EDPMS, फैक्टरिंग, फॉरफेटिंग, आयात वित्त, IDPMS, व्यापार क्रेडिट (आपूर्तिकर्ता और खरीदार का क्रेडिट), केस स्टडीज | |
| ECBs और विदेशी निवेश | बाहरी वाणिज्यिक उधार (ECBs) – अवधारणाएं, रिपोर्टिंग, इक्विटी में परिवर्तन; विदेशी निवेश – निवेशक, संस्थाएं, उपकरण, निषिद्ध क्षेत्र, शेयरों का गिरवी रखना, परिचालन दिशानिर्देश, NDI नियम, दस्तावेजीकरण | |
| विदेशी व्यापार में जोखिम और ECGC | अंतर्राष्ट्रीय व्यापार जोखिमों के प्रकार, देश का जोखिम (Country Risk), ECGC की भूमिका, ECGC नीतियां, बैंकों के लिए उत्पाद, सुरक्षा उपाय, दावे | |
| EXIM बैंक, RBI, FEMA, FEDAI की भूमिका | EXIM बैंक की भूमिका, RBI के विनिमय नियंत्रण नियम, FEMA 1999, FEDAI के कार्य और नियम, ADR/GDR/FCCB अवलोकन | |
| IFSC, GIFT सिटी | कार्यक्षेत्र, अवसर, IFSC बैंकिंग इकाइयों (IBUs) के लिए दिशानिर्देश, IFSCA की भूमिका, नियामक ढांचा, अनुमत गतिविधियां, FPIs के लिए छूट | |
| अंतर्राष्ट्रीय बैंकिंग में प्रौद्योगिकी | अंतर्राष्ट्रीय बैंकिंग में डिजिटलीकरण, लाभ और सीमाएं, फिनटेक प्लेटफॉर्म, वितरण चैनल, व्यापार वित्त में ब्लॉकचेन, फिनटेक में चुनौतियां | |
| मॉड्यूल B: जोखिम प्रबंधन (Risk Management) | जोखिम की मूल बातें और ढांचा | जोखिम क्या है, जोखिम-पूंजी-रिटर्न के बीच संबंध, जोखिम प्रबंधन क्यों, बुनियादी जोखिम प्रबंधन ढांचा |
| बैंकिंग जोखिम | जोखिमों की पहचान, बैंकिंग बुक बनाम ट्रेडिंग बुक, बैलेंस शीट से बाहर के जोखिम, बैंकिंग जोखिमों के प्रकार | |
| जोखिम विनियम (बेसल मानदंड) | जोखिम-आधारित विनियमन की आवश्यकता, बेसल I (1988), 1996 संशोधन (बाजार जोखिम), बेसल II – लक्ष्य, स्तंभ (क्रेडिट, बाजार, परिचालन जोखिम, पर्यवेक्षी समीक्षा, बाजार अनुशासन), बेसल III (कैपिटल बफर्स, लीवरेज अनुपात, SIFIs), जोखिम आधारित पर्यवेक्षण | |
| बाजार जोखिम | अर्थ, बैंकों में बाजार जोखिम, ढांचा, संरचना, जोखिम पहचान, माप, निगरानी, रिपोर्टिंग, ट्रेडिंग में तरलता जोखिम, शमन | |
| क्रेडिट जोखिम | ढांचा, संरचना, जोखिम पहचान, माप, नीतियां, लेनदेन और पोर्टफोलियो स्तर पर निगरानी, ऋण समीक्षा तंत्र, शमन, प्रतिभूतिकरण (Securitisation), क्रेडिट डेरिवेटिव | |
| परिचालन जोखिम और एकीकृत जोखिम प्रबंधन | परिचालन जोखिमों के प्रकार, घटना के प्रकार, जोखिम अभ्यास, संरचनाएं और प्रक्रियाएं, निगरानी और नियंत्रण, शमन, परिदृश्य विश्लेषण, एकीकृत जोखिम प्रबंधन की आवश्यकता और चुनौतियां | |
| तरलता जोखिम प्रबंधन | महत्व, ड्राइवर, तरलता जोखिम के प्रकार, शासन (Governance), रणनीतियां, स्ट्रेस टेस्टिंग, आकस्मिक वित्तपोषण, विदेशी शाखाएं, MIS, RBI रिपोर्टिंग, आंतरिक नियंत्रण | |
| बेसल III तरलता मानक | तरलता कवरेज अनुपात (LCR), शुद्ध स्थिर वित्तपोषण अनुपात (NSFR), तरलता निगरानी उपकरण | |
| मॉड्यूल C: ट्रेजरी प्रबंधन (Treasury Management) | परिचय | ट्रेजरी प्रबंधन का अर्थ, कार्य, वैश्वीकरण की भूमिका, लाभ केंद्र के रूप में ट्रेजरी, ट्रेजरी का संगठन |
| ट्रेजरी उत्पाद | विदेशी मुद्रा उत्पाद, मुद्रा बाजार उपकरण, प्रतिभूति बाजार उत्पाद, घरेलू और वैश्विक बाजार | |
| अंतर्राष्ट्रीय इक्विटी और ऋण उत्पाद | नियामक वातावरण, GDRs, IDRs, ECBs, ट्रेड क्रेडिट, मसाला बॉन्ड (रुपया मूल्यवर्ग के बॉन्ड) | |
| वित्तपोषण और नियामक पहलू | CRR, SLR, लिक्विडिटी एडजस्टमेंट फैसिलिटी (LAF), भुगतान और निपटान प्रणाली | |
| ट्रेजरी जोखिम प्रबंधन | पर्यवेक्षण और नियंत्रण, बाजार और क्रेडिट जोखिम, जोखिम माप (VaR, अवधि), जोखिम प्रबंधन में डेरिवेटिव का उपयोग | |
| डेरिवेटिव उत्पाद | OTC और एक्सचेंज ट्रेडेड डेरिवेटिव, फॉरवर्ड, ऑप्शंस, फ्यूचर्स, स्वैप, ब्याज दर और मुद्रा स्वैप, RBI दिशानिर्देश, भारतीय बाजार के विकास | |
| ट्रेजरी और ALM | परिसंपत्ति-देयता प्रबंधन (तरलता और ब्याज दर जोखिम), ALM में ट्रेजरी की भूमिका, ALM में डेरिवेटिव, क्रेडिट डेरिवेटिव, ट्रांसफर प्राइसिंग, नीति ढांचा | |
| मॉड्यूल D: बैलेंस शीट प्रबंधन | परिसंपत्तियां और देनदारियां | बैंक की बैलेंस शीट के घटक, परिसंपत्ति-देयता प्रबंधन (ALM) – उद्देश्य, लक्ष्य, समन्वित बैलेंस शीट प्रबंधन |
| पूंजी पर्याप्तता और बेसल मानदंड | बेसल स्तंभ – न्यूनतम पूंजी (स्तंभ 1), पर्यवेक्षी समीक्षा (स्तंभ 2), बाजार अनुशासन (स्तंभ 3) | |
| परिसंपत्ति वर्गीकरण और प्रावधान | परिसंपत्ति वर्गीकरण के लिए RBI मानदंड, प्रावधान दिशानिर्देश | |
| तरलता प्रबंधन | परिभाषा, आयाम, जोखिम प्रबंधन में भूमिका, तरलता जोखिम का मापन और प्रबंधन | |
| ब्याज दर जोखिम प्रबंधन | ब्याज दर जोखिम के स्रोत और प्रभाव, माप तकनीक, रणनीतियां और नियंत्रण, बैंकिंग बुक में IRR पर RBI के ड्राफ्ट दिशानिर्देश | |
| RAROC और लाभ योजना | लाभ योजना, जोखिम एकत्रीकरण, पूंजी आवंटन, आर्थिक पूंजी, RAROC (जोखिम समायोजित पूंजी रिटर्न) |
CAIIB ABFM पाठ्यक्रम के तहत कौन से विषय शामिल हैं?
CAIIB उन्नत व्यवसाय और वित्तीय प्रबंधन (ABFM) पाठ्यक्रम चार मॉड्यूल में विभाजित है: मॉड्यूल A: प्रबंधन प्रक्रिया (The Management Process), मॉड्यूल B: वित्तीय प्रबंधन की उन्नत अवधारणाएं (Advanced Concepts of Financial Management), मॉड्यूल C: मूल्यांकन, विलय और अधिग्रहण (Valuation, Mergers & Acquisitions), और मॉड्यूल D: उभरते हुए व्यावसायिक समाधान (Emerging Business Solutions)। पाठ्यक्रम के अंतर्गत उप-विषयों का विवरण इस प्रकार है:
| मॉड्यूल | शामिल विषय |
| मॉड्यूल A: प्रबंधन प्रक्रिया | प्रबंधन की मूल बातें – परिभाषा, प्रक्रिया, कार्य, महत्व, विचार और दृष्टिकोण, चुनौतियां और अवसर, रणनीतिक प्रबंधन, व्यावसायिक वातावरण विश्लेषण योजना (Planning) – सिद्धांत, चरण, महत्व, फायदे और नुकसान, MBO, योजना के घटक, आकस्मिक योजना, पूर्वानुमान और निर्णय लेना संगठन (Organizing) – सिद्धांत, महत्व, चरण, सिद्धांत, संगठनों के प्रकार, संरचना, चार्ट, नियमावली, संस्कृति, अधिकार और जिम्मेदारी, संरचना में मुद्दे, परिवर्तन, संघर्ष की गतिशीलता स्टाफिंग (Staffing) – कार्य, उद्देश्य, प्रकृति, सिस्टम दृष्टिकोण, भर्ती, चयन, प्रशिक्षण, प्रतिधारण (Retention), विकास, ज्ञान और सीखना, प्रदर्शन मूल्यांकन, HRD निर्देशन (Directing) – विशेषताएं, महत्व, तत्व, नेतृत्व, प्रेरणा, संचार, पर्यवेक्षण नियंत्रण (Controlling) – बुनियादी बातें, विशेषताएं, लाभ, सीमाएं, प्रकार, प्रक्रिया, योजना-नियंत्रण लिंक, तकनीकें, नियंत्रण में IT |
| मॉड्यूल B: वित्तीय प्रबंधन की उन्नत अवधारणाएं | वित्त के स्रोत और वित्तीय रणनीतियां – इक्विटी, आंतरिक लाभ, वरीयता पूंजी, सावधि ऋण, डिबेंचर, वैकल्पिक वित्तपोषण रणनीतियां वित्तीय और परिचालन उत्तोलन (Leverages) – वित्तीय उत्तोलन (DFL), परिचालन उत्तोलन (DOL), संयुक्त उत्तोलन पूंजी निवेश निर्णय – उद्देश्य, नकदी प्रवाह का अनुमान, पूर्वानुमान, बजट संबंध, नकदी पूर्वानुमान, लागत विश्लेषण, मूल्यांकन के तरीके, SCBA अंतर्राष्ट्रीय पूंजी बजट – विदेशी निवेश विश्लेषण, नकदी प्रवाह, छूट दरें, पोर्टफोलियो निवेश, विनिमय और देश का जोखिम, CAPM, APT, विदेशी परियोजना मूल्यांकन, ट्रांसफर प्राइसिंग प्रभाव पूंजी बजट में जोखिम और अनिश्चितता – संवेदनशीलता, परिदृश्य, हिलियर, सिमुलेशन, डिसीजन ट्री, कॉर्पोरेट जोखिम, जोखिम के तहत परियोजना चयन निर्णय लेना (Decision Making) – CVP विश्लेषण, प्रासंगिक लागत, ABC लागत, नैतिक और गैर-वित्तीय विचार |
| मॉड्यूल C: मूल्यांकन, विलय और अधिग्रहण | कॉर्पोरेट मूल्यांकन – दृष्टिकोण, समायोजित बुक वैल्यू, स्टॉक और ऋण, तुलना, DCF दृष्टिकोण DCF मूल्यांकन – इनपुट, मॉडल, डिविडेंड डिस्काउंट मॉडल, प्रयोज्यता अन्य मूल्यांकन मॉडल – सापेक्ष मूल्यांकन, इक्विटी मल्टीपल्स, EV मल्टीपल्स, बुक वैल्यू, स्टॉक और ऋण दृष्टिकोण विशेष मामले – अमूर्त संपत्ति (Intangibles), स्टार्टअप, संकटग्रस्त फर्में, सेवा कंपनियां, होल्डिंग कंपनियां, ई-कॉमर्स, वारंट, परिवर्तनीय विलय और अधिग्रहण – प्रकार, कारण, यांत्रिकी, लागत/लाभ, विनिमय अनुपात, टेकओवर, LBOs, गठबंधन, विनिवेश (Divestitures), डीमर्जर डील स्ट्रक्चरिंग और रणनीतियां – बातचीत (Negotiations), कानूनी और कर पहलू, रिपोर्टिंग, वित्तपोषण, सीमा पार अधिग्रहण |
| मॉड्यूल D: उभरते हुए व्यावसायिक समाधान | हाइब्रिड फाइनेंस – प्रकार, वारंट, परिवर्तनीय, FCCBs, मेजेनाइन, अभिनव हाइब्रिड स्टार्ट-अप फाइनेंस – लाभ, चुनौतियां, नीतियां, पिचिंग, फंडिंग, योजनाएं, कर छूट, निवेशक दृष्टिकोण प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल – विशेषताएं, वित्तपोषण विकल्प, लाभ, कमियां, ड्यू डिलिजेंस, निकास रणनीतियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस – इतिहास, BFSI में अनुप्रयोग, न्यूरल नेटवर्क, उपकरण, तर्कसंगत एजेंट, नैतिकता और नैतिकता बिजनेस एनालिटिक्स – अनिवार्य तत्व, प्रकार, तत्व, बिग डेटा, वेब बनाम मोबाइल एनालिटिक्स, महत्व ग्रीन और सस्टेनेबल फाइनेंसिंग – ISO मानक, सर्वोत्तम अभ्यास, भारत की नीतियां, चुनौतियां, RBI का दृष्टिकोण SPACs – लाभ, नुकसान, संरचना, प्रक्रिया, हितधारक, डी-स्पैक प्रक्रिया |
CAIIB BRBL पाठ्यक्रम के तहत कौन से विषय शामिल हैं?
CAIIB बैंकिंग विनियम और व्यावसायिक कानून (Banking Regulations and Business Laws – BRBL) पाठ्यक्रम चार मॉड्यूल में संरचित है: मॉड्यूल A: विनियम और अनुपालन (Regulations and Compliance), मॉड्यूल B: महत्वपूर्ण अधिनियम/कानून और बैंकिंग संचालन के कानूनी पहलू, मॉड्यूल C: व्यावसायिक कानून (Business Laws), और मॉड्यूल D: बैंकिंग कार्यों के संदर्भ में वाणिज्यिक और अन्य कानून। पाठ्यक्रम के अंतर्गत उप-विषयों का विवरण इस प्रकार है:
| मॉड्यूल | शामिल विषय |
| मॉड्यूल A: विनियम और अनुपालन | बैंकों का विनियमन – बैंकिंग कंपनियों का व्यवसाय, प्रबंधन पर नियंत्रण, न्यूनतम पूंजी, नकद आरक्षित, बैंकिंग कंपनियों का लाइसेंस, शाखा लाइसेंसिंग नीति, विलय और समामेलन, ऋण और अग्रिम पर नियामक प्रतिबंध, प्राथमिकता क्षेत्र ऋण, RBI अधिनियम, CRR, SLR, भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम के प्रावधान, NPA प्रबंधन, बेसल मानदंड बैंकों में अनुपालन कार्य – आवश्यकता, कार्यक्षेत्र, संरचना, CCO की भूमिका, कानूनों/विनियमों का अनुपालन, जोखिम प्रबंधन, धोखाधड़ी जोखिम प्रबंधन, कॉर्पोरेट गवर्नेंस का महत्व, व्हिसलब्लोअर नीति |
| मॉड्यूल B: महत्वपूर्ण अधिनियम/कानून और बैंकिंग संचालन के कानूनी पहलू | बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 – महत्वपूर्ण प्रावधान, लाइसेंसिंग, शाखा विस्तार, शेयरधारिता, प्रबंधन नियंत्रण भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 – RBI के कार्य, मौद्रिक नीति, पर्यवेक्षण और नियंत्रण परकाम्य लिखित अधिनियम (Negotiable Instruments Act), 1881 – विशेषताएं, उपकरणों के प्रकार, पार्टियां, पृष्ठांकन (Endorsements), धारक/यथाविधि धारक, अनादर और नोटिंग, क्रॉसिंग, चेक का बाउंस होना, दंड बैंकर्स बुक साक्ष्य अधिनियम, 1891 – प्रावधान, साक्ष्य के रूप में बैंक रिकॉर्ड धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 – परिभाषाएं, बैंकिंग कंपनियों के दायित्व, RBI दिशानिर्देश, KYC/AML मानदंड |
| मॉड्यूल C: व्यावसायिक कानून (Business Laws) | भारतीय अनुबंध अधिनियम, 1872 – एक वैध अनुबंध के आवश्यक तत्व, प्रस्ताव और स्वीकृति, प्रतिफल (Consideration), क्षमता, स्वतंत्र सहमति, शून्य समझौते, प्रदर्शन, उल्लंघन, उपचार भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 – भागीदारी के प्रकार, पंजीकरण, भागीदारों के संबंध, विघटन, अधिकार और दायित्व सीमित देयता भागीदारी (LLP) अधिनियम, 2008 – प्रकृति, निगमन, भागीदार और नामित भागीदार, देयताएं, LLP में परिवर्तन, समापन कंपनी अधिनियम, 2013 – कंपनियों की परिभाषा और प्रकार, निगमन, MOA, AOA, विवरण पत्रिका (Prospectus), शेयर पूंजी, निदेशक, बैठकें, लाभांश, ऑडिट, जांच, समापन |
| मॉड्यूल D: बैंकिंग कार्यों के संदर्भ में वाणिज्यिक और अन्य कानून | संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम, 1882 – बंधक (Mortgage), शुल्क, बिक्री, पट्टा (Lease), उपहार, अभियोज्य दावा (Actionable Claim) माल बिक्री अधिनियम, 1930 – अनुबंध का गठन, शर्तें और वारंटी, स्वामित्व का हस्तांतरण, अदत्त विक्रेता के अधिकार भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 (बैंकिंग प्रासंगिकता) – बैंकर के अधिकार, भागीदारी फर्मों को ऋण देना भारतीय ट्रस्ट अधिनियम, 1882 – ट्रस्टियों के कर्तव्य और दायित्व, अधिकार और शक्तियां सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 – इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की कानूनी मान्यता, डिजिटल हस्ताक्षर, साइबर अपराध, दंड उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 – उपभोक्ता अधिकार, शिकायत निवारण, लोकपाल की भूमिका, बैंकिंग क्षेत्र में प्रयोज्यता |
CAIIB वैकल्पिक पेपर 1 ग्रामीण बैंकिंग (Rural Banking) पाठ्यक्रम के तहत कौन से विषय शामिल हैं?
CAIIB वैकल्पिक पेपर ग्रामीण बैंकिंग पाठ्यक्रम चार मॉड्यूल में विभाजित है: मॉड्यूल A: ग्रामीण भारत, मॉड्यूल B: ग्रामीण विकास का वित्तपोषण, मॉड्यूल C: प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र वित्तपोषण और सरकारी पहल, और मॉड्यूल D: ग्रामीण बैंकिंग में समस्याएं और संभावनाएं। विस्तृत पाठ्यक्रम इस प्रकार है:
| मॉड्यूल | शामिल विषय |
| मॉड्यूल A: ग्रामीण भारत | जनसांख्यिकीय विशेषताएं – जनसंख्या, साक्षरता, छठी आर्थिक गणना, कृषि गणना, सामाजिक-आर्थिक विकास संकेतक, स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, ग्रामीण-शहरी प्रवास ग्रामीण समाज की विशेषताएं – सामाजिक स्तरीकरण, स्थानीय संस्थान, NIRD और PR आर्थिक विशेषताएं – कृषि, गैर-कृषि गतिविधियां, GDP और GVA, ग्रामीण मुद्रा बाजार (औपचारिक और अनौपचारिक), ग्रामीण ऋणग्रस्तता, ग्रामीण गरीबी, गरीबी रेखा माप के तरीके, सतत विकास लक्ष्य (SDGs) बुनियादी ढांचा – परिवहन, बाजार, ग्रामीण विद्युतीकरण, अन्य सेवाएं कृषि अर्थव्यवस्था – भारतीय कृषि की संरचना और विशेषताएं, आर्थिक विकास में भूमिका, कृषि-उद्योग संबंध, मुद्दे और बाधाएं, तकनीकी परिवर्तन, उभरते मुद्दे, NMSA ग्रामीण विकास नीतियां – योजनाएं, कौशल विकास, SPMRM, पिछड़ा क्षेत्र कार्यक्रम, शुष्क भूमि खेती, मिट्टी और जल संरक्षण, RIDF, सुधार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रभाव ग्रामीण क्षेत्रों से संबंधित मुद्दे – ग्रामीण विकास के घटक और दृष्टिकोण, सतत विकास, ग्रामीण प्रबंधन के मुद्दे, विपणन प्रबंधन, कृषि कीमतों का महत्व |
| मॉड्यूल B: ग्रामीण विकास का वित्तपोषण | ग्रामीण वित्तीय सेवाओं का विनियमन – RFIs की स्थापना, RBI और NABARD की भूमिका, लीड बैंक योजना ग्रामीण ऋण संस्थान – सहकारी ऋण, RRBs, वाणिज्यिक बैंक, अन्य संस्थान, ICT की भूमिका, समावेशी विकास पहल, ग्रामीण और सूक्ष्म बीमा, MFIs, बिजनेस फैसिलिटेटर और कॉरेस्पोंडेंट कृषि और संबद्ध गतिविधियों का वित्तपोषण – फसल ऋण, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), NABARD पुनर्वित्त, प्राकृतिक आपदाओं में राहत, संबद्ध गतिविधियों के लिए सावधि ऋण, विभिन्न क्षेत्रों के लिए ऋण (वृक्षारोपण, डेयरी, पोल्ट्री, आदि), सोने के बदले अग्रिम ग्रामीण गैर-कृषि क्षेत्र का वित्तपोषण – महत्व, संरचना, विकास, मुद्दे, पारंपरिक उद्योग, कच्चा माल, विपणन, संस्थागत वित्त, प्रौद्योगिकी विकास और प्रशिक्षण SME वित्त – परिभाषा और महत्व, MSME क्रेडिट, ऋण मूल्यांकन, SIDBI की भूमिका, RBI और भारत सरकार की नीतियां, MSME समस्याएं, भुगतान में देरी, PCRS, पुनरुद्धार और पुनर्वास ढांचा परियोजना अवधारणाएं और बैंक योग्य परियोजनाएं – परियोजना चक्र, सिंचाई, कृषि मशीनीकरण, वृक्षारोपण, डेयरी, पोल्ट्री, रेशम उत्पादन, मछली पालन, मधुमक्खी पालन, ग्रामीण गोदाम, मशरूम की खेती |
| मॉड्यूल C: प्राथमिकता क्षेत्र वित्तपोषण और सरकारी पहल | प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र ऋण (PSL) – विकास, दिशानिर्देश, श्रेणियां, लक्ष्य, सामान्य दिशानिर्देश, क्रेडिट उपलब्धि गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम – सरकारी पहल, योजनाओं की विशेषताएं, कल्याणकारी कार्यक्रम ग्रामीण आवास और शिक्षा ऋण – PMAY (ग्रामीण), शिक्षा ऋण योजनाएं वित्तीय समावेशन और शिक्षा – RBI की पहल, FI और FE के लिए राष्ट्रीय रणनीतियां, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT), NRLM/NULM, प्राकृतिक आपदाओं के लिए राहत, SC/ST और अल्पसंख्यकों को ऋण, गरीबी उन्मूलन और रोजगार कार्यक्रम |
| मॉड्यूल D: ग्रामीण बैंकिंग में समस्याएं और संभावनाएं | ग्रामीण विकास में बैंकिंग की भूमिका – उभरते रुझान, वर्तमान परिदृश्य, चिंता के क्षेत्र, समावेशी बैंकिंग वित्तीय समावेशन और ग्रामीण विकास में प्रौद्योगिकी की भूमिका – डिजिटल परिवर्तन, कृषि के लिए प्रौद्योगिकी, कृषि में IoT, कृषि का आधुनिक प्रबंधन, मूल्य श्रृंखला संचालन, विश्व स्तर पर और भारत में IoT की प्रगति, समावेशन में फिनटेक बैंक योग्य अवसरों के रूप में गरीबों का वित्तपोषण – माइक्रोक्रेडिट मॉडल, SHG-बैंक लिंकेज प्रोग्राम (SBLP), MFIs, NABARD की भूमिका, SIDBI और माइक्रोक्रेडिट, RBI और भारत सरकार की पहल |
CAIIB वैकल्पिक पेपर 2 HRM पाठ्यक्रम के तहत कौन से विषय शामिल हैं?
CAIIB वैकल्पिक पेपर मानव संसाधन प्रबंधन (Human Resource Management) पाठ्यक्रम पांच मॉड्यूल में विभाजित है: मॉड्यूल A: मानव संसाधन प्रबंधन, मॉड्यूल B: HR रणनीति बनाना, मॉड्यूल C: प्रेरणा, प्रशिक्षण और कौशल विकास, मॉड्यूल D: कार्मिक प्रबंधन और औद्योगिक संबंध, और मॉड्यूल E: HRM में उभरते परिदृश्य। आगे का विवरण इस प्रकार है:
| मॉड्यूल | शामिल विषय |
| मॉड्यूल A: मानव संसाधन प्रबंधन | HRM के मूल सिद्धांत (नई अंतर्दृष्टि, HRM में नैतिकता) संगठनात्मक व्यवहार (व्यवहार की गतिशीलता, नेतृत्व, गुणवत्ता पहल, तनाव प्रबंधन, व्यावसायिक शिष्टाचार) संगठनात्मक परिवर्तन (परिवर्तन एजेंट, कोटर का 8-चरणीय मॉडल, जिम्मेदारी चार्टिंग) भारतीय बैंकों में HRM (पारंपरिक भूमिका, चुनौतियां, कोर बैंकिंग मुद्दे) ज्ञान प्रबंधन (Knowledge Management) (KM अवधारणाएं, बैंकों में IT और डेटाबेस प्रबंधन) |
| मॉड्यूल B: HR रणनीति बनाना | एक रणनीतिक खिलाड़ी के रूप में HR (रणनीति निर्माण, व्यावसायिक मूल्य निर्माण, रणनीति निष्पादन, कारक विश्लेषण) CEO और टीम (भूमिकाएं, प्रतिभा प्रबंधन, उत्तराधिकार योजना, HR ऑडिट) संचार (प्रकार, बाधाएं, प्रभावी संचार, HR की भूमिका) HR कार्य (HR योजना, भर्ती, प्रौद्योगिकी का प्रभाव, सोशल मीडिया नीति, मुआवजा, एट्रिशन, कर्मचारी जोखिम मूल्यांकन) प्रदर्शन प्रबंधन (PMS, मूल्यांकन, 360-डिग्री मूल्यांकन, योग्यता मैपिंग, KRAs) |
| मॉड्यूल C: प्रेरणा, प्रशिक्षण और कौशल विकास | सीखने की प्रक्रिया (सीखने का सिद्धांत, कर्मचारी व्यवहार) कर्मचारी प्रेरणा (प्रेरणा सिद्धांत, दृष्टिकोण, कार्य संवर्धन, संतुष्टि) कर्मचारी विकास (प्रशिक्षण बनाम विकास, प्रशिक्षण की जरूरतें, बैंकिंग में भूमिका) प्रशिक्षण पद्धति (शिक्षण संगठन, प्रशिक्षण के प्रकार, करियर विकास, सॉफ्ट स्किल्स, प्रशिक्षण पर ROI, सर्वोत्तम अभ्यास) |
| मॉड्यूल D: कार्मिक प्रबंधन और औद्योगिक संबंध | औद्योगिक संबंध (भाग A) (कार्मिक कार्य, IR कोड 2020, श्रम कानून) औद्योगिक संबंध (भाग B) (ट्रेड यूनियन, सामूहिक सौदेबाजी) कर्मचारी अनुशासन और शिकायत निवारण (अवधारणाएं, संघर्ष प्रबंधन, तंत्र) प्रबंधन में श्रमिकों की भागीदारी (WPM) (अवधारणाएं, भारतीय बैंकिंग अनुभव) कर्मचारी अनुशासन (अनुशासन प्रबंधन) (कार्यस्थल अनुशासन, जांच, धोखाधड़ी, सतर्कता, विविधता, POSH अधिनियम 2013) |
| मॉड्यूल E: HRM में उभरते परिदृश्य | कर्मचारी जुड़ाव (Employee Engagement) (जेन वाई रणनीतियां, WFH, हाइब्रिड मॉडल, नए रोजगार मॉडल) संगठनात्मक संस्कृति और रचनात्मकता (संस्कृति, नवाचार, रचनात्मक नेतृत्व, नैतिक संस्कृति) कॉर्पोरेट स्थिरता और ग्रीन HRM (सतत HRM, बैंकिंग में ग्रीन HR प्रथाएं) HR एनालिटिक्स और AI-आधारित HR समाधान (HR मेट्रिक्स, HR में AI, HR उद्यमिता) VUCA और BANI परिदृश्यों में संकट प्रबंधन (अनिश्चितता, संकट मॉडल, HR की भूमिका) व्यावसायिक नैतिकता, कॉर्पोरेट गवर्नेंस और CSR (नैतिक संगठन, शासन प्रथाएं, भारत में CSR) |
CAIIB वैकल्पिक पेपर 3 IT और डिजिटल बैंकिंग पाठ्यक्रम के तहत कौन से विषय शामिल हैं?
सूचना प्रौद्योगिकी और डिजिटल बैंकिंग पर CAIIB वैकल्पिक पेपर चार मॉड्यूल में विभाजित है: मॉड्यूल A: सूचना प्रौद्योगिकी का परिचय, मॉड्यूल B: सिस्टम और डिजाइन, मॉड्यूल C: बैंकिंग प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग और डिजिटल बैंकिंग, और मॉड्यूल D: सूचना प्रणाली सुरक्षा नियंत्रण और ऑडिट। IT और डिजिटल बैंकिंग पाठ्यक्रम का विवरण इस प्रकार है:
| मॉड्यूल | विषय और उप-विषय |
| मॉड्यूल A: सूचना प्रौद्योगिकी का परिचय | – सूचना प्रौद्योगिकी और इसके निहितार्थ – सूचना प्रौद्योगिकी का प्रभाव, रणनीतिक मुद्दे और IT – कंप्यूटिंग का परिचय: कंप्यूटर, डेटा प्रोसेसिंग और तरीके, कंप्यूटिंग वातावरण, सर्वर का वर्चुअलाइजेशन – सॉफ्टवेयर का परिचय: कंप्यूटर सॉफ्टवेयर, ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर, वेब ब्राउज़र – नेटवर्किंग सिस्टम: डेटा संचार, WAN तकनीक का अवलोकन, TCP/IP और इंटरनेट |
| मॉड्यूल B: सिस्टम और डिजाइन | – सूचना प्रणाली का परिचय: सूचना प्रणाली के प्रकार, MIS संरचना, निर्णय समर्थन प्रणाली (DSS), कार्यकारी सूचना प्रणाली (EIS), समूह निर्णय समर्थन प्रणाली (GDSS), परियोजना प्रबंधन, क्षमता परिपक्वता मॉडल (CMM), डेटा सेंटर बनाना – डेटाबेस प्रबंधन प्रणाली (DBMS): DBMS अवधारणाएं, रिलेशनल डेटाबेस, डेटाबेस का सामान्यीकरण, Oracle – डेटा वेयरहाउसिंग और डेटा माइनिंग: डेटा वेयरहाउस की आवश्यकता, आर्किटेक्चर, विकल्प, डेटा वेयरहाउस विकसित करना, बिजनेस इंटेलिजेंस – विशेषज्ञ प्रणाली और न्यूरल नेटवर्क, डेटा माइनिंग, एनालिटिक्स में उभरते रुझान |
| मॉड्यूल C: बैंकिंग प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग और डिजिटल बैंकिंग | – ई-लर्निंग वातावरण: मानक, डिजाइन, वर्चुअल क्लासरूम, उभरते रुझान, महामारी का प्रभाव – बैंकिंग सॉफ्टवेयर: IBS, केंद्रीकृत बैंकिंग समाधान (CBS), ऑनलाइन बैंकिंग विशेषताएं, ISPs/होस्टिंग/बैंडविड्थ, उभरते रुझान, विक्रेता चयन और प्रतिधारण – इलेक्ट्रॉनिक क्लियरिंग और सेटलमेंट सिस्टम: MICR/OCR/CTS, डेबिट और क्रेडिट क्लियरिंग, RTGS, NEFT, NPCI उत्पाद और सेवाएं, SFMS – प्लास्टिक मनी: क्रेडिट, डेबिट, स्मार्ट कार्ड, CVV/CSC, RuPay, पेमेंट गेटवे और SET, ATM और POS, कार्ड टोकेनाइजेशन – इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स और बैंकिंग: ई-बिजनेस, ई-कॉमर्स, बिल्डिंग ब्लॉक्स, ई-बैंकिंग, मोबाइल भुगतान, SMS बैंकिंग, कॉल सेंटर, EBPP, उभरते डिजिटल भुगतान – IT अधिनियम 2000/2008: कंप्यूटर अपराध, कानूनी मुद्दे, अपराधों का सार, 2008 संशोधन, DRM, नवीनतम विकास – उभरती प्रौद्योगिकियां: ओपन बैंकिंग, APIs और एंबेडेड बैंकिंग, बिग डेटा एनालिटिक्स, ब्लॉकचेन, AI और ML, साइबर सुरक्षा – जीरो ट्रस्ट, 5G, फिनटेक और क्लाउड, DBUs, CBDCs |
| मॉड्यूल D: सूचना प्रणाली सुरक्षा नियंत्रण और ऑडिट | – कंप्यूटर सुरक्षा: भौतिक, तार्किक, नेटवर्क, बायोमेट्रिक सुरक्षा, ISO 27000 सीरीज, बेसल सिफारिशें, वायरस और धोखाधड़ी – संचार सुरक्षा: क्रिप्टोग्राफी, डिजिटल हस्ताक्षर, PKI, प्रमाणन प्राधिकरण – व्यावसायिक निरंतरता और आपदा रिकवरी योजना (BCP/DRP): BCP बनाम DRP, RBI दिशानिर्देश, आपदा बचाव और रिकवरी – सूचना प्रणाली ऑडिट: अवधारणा, प्रक्रियाएं, सुरक्षा, IS ऑडिट नियंत्रण और दृष्टिकोण, RBI दिशानिर्देश – प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया – RFP और SLA: RFP प्रक्रिया, प्रस्ताव मूल्यांकन, अनुबंध समन्वय, SLA संरचना, SLA प्रबंधन, IT सेवाओं की आउटसोर्सिंग पर RBI दिशानिर्देश – साइबर सुरक्षा (2016) और डिजिटल भुगतान सुरक्षा (2021) पर RBI दिशानिर्देश: साइबर बनाम सूचना सुरक्षा, RBI साइबर सुरक्षा दिशानिर्देश (2016), डिजिटल भुगतान सुरक्षा पर RBI मास्टर निर्देश (2021) |
CAIIB वैकल्पिक पेपर 4 जोखिम प्रबंधन (Risk Management) पाठ्यक्रम के तहत कौन से विषय शामिल हैं?
जोखिम प्रबंधन पर CAIIB वैकल्पिक पेपर छह मॉड्यूल में विभाजित है: मॉड्यूल A: जोखिम और जोखिम प्रबंधन ढांचा, मॉड्यूल B: क्रेडिट जोखिम, मॉड्यूल C: बाजार जोखिम, मॉड्यूल D: परिचालन जोखिम, मॉड्यूल E: जोखिम प्रबंधन पर बेसल और RBI दिशानिर्देश, और मॉड्यूल F: डेरिवेटिव और जोखिम प्रबंधन, साथ ही सांख्यिकीय अवधारणाओं पर एक परिशिष्ट। विस्तृत पाठ्यक्रम इस प्रकार है:
| मॉड्यूल | विषय और उप-विषय |
| मॉड्यूल A: जोखिम और जोखिम प्रबंधन ढांचा | – बैंक विशेष क्यों हैं: कार्य, अर्थव्यवस्था में भूमिका, विशिष्टता – बैंकों में जोखिम और जोखिम प्रबंधन: जोखिम परिभाषा, जोखिम के प्रकार (वित्तीय और गैर-वित्तीय), अंतर्संबंध, व्यवसाय बनाम नियंत्रण जोखिम, बैंकिंग सुधार, नए रुझान – जोखिम प्रबंधन ढांचा: संकट से सबक, जोखिम संस्कृति, जोखिम की भूख (Appetite), जोखिम सीमाएं, पहचान, माप, शमन, निगरानी, MIS, एंटरप्राइज रिस्क मैनेजमेंट (ERM) – परिसंपत्ति देयता प्रबंधन (ALM) और ब्याज दर जोखिम: उद्देश्य, ALM प्रक्रिया, अवधि GAP, स्ट्रेस टेस्टिंग, जोखिम शमन – तरलता जोखिम प्रबंधन: तरलता बनाम शोधन क्षमता (Solvency), प्रकार, बैलेंस शीट पर प्रभाव, पहचान और माप |
| मॉड्यूल B: क्रेडिट जोखिम | – क्रेडिट जोखिम प्रबंधन ढांचा: ऋणी बनाम पोर्टफोलियो जोखिम, व्यवस्थित बनाम अव्यवस्थित जोखिम, क्रेडिट जोखिम संस्कृति, ऋण नीति, अंडरराइटिंग मानदंड, ड्यू डिलिजेंस, संगठनात्मक संरचना – ऋणी/उधारकर्ता जोखिम: व्यावसायिक जोखिम, वित्तीय जोखिम, उद्योग जोखिम, इकाई स्तर का जोखिम – क्रेडिट रेटिंग प्रणाली: आंतरिक और बाहरी रेटिंग, असाइनमेंट, विशेषताएं, उपयोगिता – पोर्टफोलियो क्रेडिट जोखिम: व्यवस्थित और अव्यवस्थित जोखिम, एकाग्रता और सहसंबंध जोखिम – क्रेडिट जोखिम मॉडल: प्रकार और उपयोग – क्रेडिट जोखिम का मापन: PD, LGD, EAD, RAROC, आर्थिक पूंजी, जोखिम-आधारित मूल्य निर्धारण – क्रेडिट डेरिवेटिव: CDS, TRS, क्रेडिट विकल्प, क्रेडिट-लिंक्ड नोट्स, सुरक्षा खरीदार/विक्रेता |
| मॉड्यूल C: बाजार जोखिम | – बाजार जोखिम अवलोकन: ट्रेडिंग पोर्टफोलियो, ब्याज दर, इक्विटी, FX, कमोडिटी मूल्य जोखिम, तरलता, प्रतिपक्ष (Counterparty) और मॉडल जोखिम – बाजार जोखिम प्रबंधन ढांचा: संगठनात्मक संरचना, रणनीति, नीतियां – निश्चित आय प्रतिभूतियां: बॉन्ड मूल्यांकन, GOI बॉन्ड, भारतीय बॉन्ड बाजार – ब्याज दर जोखिम का मापन: PVBP, अवधि, संशोधित अवधि, उत्तलता (Convexity), पोर्टफोलियो हेजिंग – वैल्यू एट रिस्क (VaR): परिभाषाएं, कार्यप्रणाली, फायदे और नुकसान, स्ट्रेस टेस्टिंग, बैक टेस्टिंग, एक्सट्रीम वैल्यू थ्योरी |
| मॉड्यूल D: परिचालन जोखिम | – परिचालन जोखिम ढांचा: परिभाषा, संस्कृति, पहचान, नीति दिशानिर्देश – हानि डेटा संग्रह: आंतरिक और बाहरी हानि डेटा, नियर मिसेस, मूल-कारण विश्लेषण (Root-Cause Analysis) – RCSA और KRI: प्रक्रिया, नियंत्रण प्रभावशीलता, जोखिम क्षेत्र, KRIs, परिदृश्य विश्लेषण – प्रौद्योगिकी जोखिम: सूचना सुरक्षा सिद्धांत, शासन, ISO 27001, साइबर धोखाधड़ी, व्यावसायिक निरंतरता, विक्रेता जोखिम, उभरती प्रौद्योगिकियां – कॉर्पोरेट गवर्नेंस: बेसल समिति दिशानिर्देश, बैंकिंग में जोखिम शासन – जलवायु जोखिम और सतत वित्त: बेसल मार्गदर्शन, जलवायु परिवर्तन से वित्तीय जोखिम, हरित वित्त (Green Finance) |
| मॉड्यूल E: बेसल और RBI दिशानिर्देश | – बैंकों को विनियमन की आवश्यकता क्यों है?: भारतीय और वैश्विक नियम, बेसल समिति, बेसल I, II, III – वैश्विक वित्तीय संकट और बेसल III: कमियां और सुधार – नियामक पूंजी और पर्याप्तता: पूंजी नियम, मानकीकृत और IRB दृष्टिकोण, क्रेडिट जोखिम शमन, बैलेंस शीट के बाहर की वस्तुएं – बाजार और परिचालन जोखिम के विरुद्ध पूंजी: VaR-आधारित शुल्क, BIA, SA, AMA, नया मानकीकृत दृष्टिकोण – ICAAP और पर्यवेक्षी समीक्षा: स्तंभ 2, स्ट्रेस टेस्ट, पूंजी योजना, जोखिम की भूख, RBI दिशानिर्देश – स्ट्रेस टेस्टिंग और PCA ढांचा – बाजार अनुशासन: खुलासे, सत्यापन, नियामक सिद्धांत – बेसल III बफर्स और अनुपात: CCB, CCyB, D-SIBs, लीवरेज और तरलता अनुपात – जोखिम आधारित पर्यवेक्षण (RBS): RBI ढांचा, पर्यवेक्षी उपकरण – जोखिम आधारित आंतरिक ऑडिट: नीति, निरीक्षण, जोखिम प्रोफाइलिंग, संचार |
| मॉड्यूल F: डेरिवेटिव और जोखिम प्रबंधन | – डेरिवेटिव अवलोकन: विशेषताएं, OTC बनाम एक्सचेंज, उपयोग और दुरुपयोग, भारतीय बाजार – फॉरवर्ड अनुबंध: मूल्य निर्धारण, FRA, अदायगी (Payoffs), जोखिम – फ्यूचर्स: क्लियरिंग हाउस, मार्जिन, मूल्य निर्धारण, वितरण, निपटान, कोंटैंगो और बैकवर्डेशन – विकल्प: कॉल और पुट, मूल्य निर्धारण, ब्याज दर विकल्प – स्वैप: IRS, कैश फ्लो गणना, स्वैपशन |
| परिशिष्ट: सांख्यिकीय अवधारणाएं | – सांख्यिकीय उपाय: माध्य, माध्यिका, फैलाव, तिरछापन, कर्टोसिस, सहसंबंध, प्रतिगमन, बीटा, पोर्टफोलियो विविधीकरण – प्रायिकता सिद्धांत: प्रायिकता, रैंडम वेरिएबल, वितरण (द्विपद, पॉइसन, सामान्य), VaR, विकल्प मूल्यांकन |
CAIIB वैकल्पिक पेपर 5 केंद्रीय बैंकिंग (Central Banking) पाठ्यक्रम के तहत कौन से विषय शामिल हैं?
केंद्रीय बैंकिंग पर CAIIB वैकल्पिक पेपर छह मॉड्यूल में विभाजित है: मॉड्यूल A: केंद्रीय बैंक का तर्क और कार्य, मॉड्यूल B: भारत में केंद्रीय बैंकिंग, मॉड्यूल C: मौद्रिक और ऋण नीतियां, मॉड्यूल D: विदेशी मुद्रा भंडार का प्रबंधन और भारतीय वित्तीय बाजार के घटक, मॉड्यूल E: विनियमन, पर्यवेक्षण और वित्तीय स्थिरता, और मॉड्यूल F: गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां और प्राथमिक डीलर, साथ ही समितियों, अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों, क्रिप्टोकरेंसी, CBDC और सतत वित्त पर एक परिशिष्ट।
| मॉड्यूल | विषय और उप-विषय |
| मॉड्यूल A: केंद्रीय बैंक का तर्क और कार्य | – केंद्रीय बैंकिंग का सिद्धांत और अभ्यास: वैश्विक विकास, केंद्रीय बैंकों का प्रसार, परस्पर विरोधी भूमिकाएं, विकसित और विकासशील देशों में विकास – कार्य: सरकार और बैंकों का बैंकर, अंतिम ऋणदाता (lender-of-last-resort), मौद्रिक नीति, मुद्रा जारी करना, भुगतान और निपटान, आंतरिक और बाहरी मूल्य बनाए रखना, वित्तीय प्रणाली का पर्यवेक्षण, वित्तीय स्थिरता, संवर्धनात्मक कार्य, संचार नीतियां – समकालीन मुद्दे: स्वायत्तता, विश्वसनीयता, जवाबदेही, पारदर्शिता, राजकोषीय नीतियों के साथ संघर्ष |
| मॉड्यूल B: भारत में केंद्रीय बैंकिंग | – भारतीय रिजर्व बैंक: संगठनात्मक विकास, संरचना और शासन, कार्यात्मक विकास, RBI अधिनियम 1934 – भारत-विशिष्ट मुद्दे: बैंकिंग विनियमन अधिनियम, FEMA, लोकपाल योजना 2006, वित्तीय सुधार, नियामक, RBI संस्थान – वित्तीय समावेशन और विकास: बाधाएं, नीतिगत हस्तक्षेप, डिजिटल संरचना, भुगतान बनाम क्रेडिट फोकस, मुद्दे और समाधान, वित्तीय समावेशन योजनाएं |
| मॉड्यूल C: मौद्रिक और ऋण नीतियां | – मौद्रिक नीति: सिद्धांत, उद्देश्य, नियम बनाम विवेक, नीति संकेतक और उपकरण (SLR, क्रेडिट नियंत्रण), संचरण तंत्र, पारदर्शिता, अंतराल (Lags), भारत में नीति निर्माण, बड़े पूंजी प्रवाह को संभालना, हालिया पहल – ऋण नीति: सिद्धांत और व्यवहार, नाममात्र बनाम वास्तविक क्रेडिट, आवंटन तंत्र, उपकरण (मार्जिन, राशनिंग, मूल्य निर्धारण) – राजकोषीय-मौद्रिक संबंध: मुद्रास्फीति बनाम विकास संतुलन, केंद्र और राज्य सरकारों का वित्त (2020-22), वित्त आयोग, राजकोषीय रोडमैप – तरलता प्रबंधन: LAF विकास, संशोधित ढांचा, OMOs, RBI कोविड-19 उपाय, मुद्रा में तरलता, G-sec, कॉर्पोरेट बॉन्ड और इक्विटी बाजार |
| मॉड्यूल D: विदेशी मुद्रा भंडार प्रबंधन और भारतीय वित्तीय बाजार | – विदेशी मुद्रा भंडार प्रबंधन: कानूनी ढांचा, जोखिम और परिचालन नियंत्रण, पारदर्शिता, स्रोत और पर्याप्तता, स्वर्ण भंडार, FCA निवेश पैटर्न, हालिया विकास – भारतीय वित्तीय प्रणाली संरचना: बाजार विकास, मुद्रा, G-sec, विदेशी मुद्रा, सुधार और सुधार के बाद का विकास, LIBOR परिवर्तन, वित्तीय बेंचमार्क शासन |
| मॉड्यूल E: विनियमन, पर्यवेक्षण और वित्तीय स्थिरता | – विनियमन और पर्यवेक्षण का विकास: सिद्धांत, वैश्विक पृष्ठभूमि, मौद्रिक बनाम पर्यवेक्षी एकीकरण, भारतीय परिप्रेक्ष्य – अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक: विकास (1950-2021), विवेकपूर्ण आवश्यकताएं, जोखिम प्रबंधन, विनियमन, पर्यवेक्षण, हालिया संचालन और प्रदर्शन – सहकारी बैंक: विकास, दोहरे नियंत्रण के मुद्दे, नियामक ढांचे को मजबूत करना, पर्यवेक्षी सुधार, हालिया विकास – वित्तीय स्थिरता: वैश्विक संकट, जोखिम, प्रारंभिक चेतावनी संकेत, बेसल II/III, उदारीकरण और वैश्वीकरण का प्रभाव, पारदर्शिता, सर्वोत्तम अभ्यास, अंतर्राष्ट्रीय मानक और कोड |
| मॉड्यूल F: गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFCs) और प्राथमिक डीलर (PDs) | – NBFCs: पंजीकरण, श्रेणियां, विकास और विवेक, RBI की भूमिका, नियामक और पर्यवेक्षी नीतियां, स्केल-आधारित ढांचा, SARFAESI, लाभांश नियम, PCA ढांचा, महामारी का प्रभाव – प्राथमिक डीलर: विकास, पात्रता, G-sec बाजार में भूमिका, तरलता सहायता, संचालन, वित्तीय प्रदर्शन, नियामक दिशानिर्देश, निवेश मानदंड, जोखिम प्रबंधन |
| परिशिष्ट | – महत्वपूर्ण RBI समितियां – प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थान (उत्पत्ति, उद्देश्य, कार्य) – क्रिप्टोकरेंसी और CBDC – सतत वित्त पर RBI की रिपोर्ट – केंद्रीय बैंकिंग शब्दों की शब्दावली |
मई-जून चक्र के लिए पेपर-वार CAIIB 2026 परीक्षा तिथियां क्या हैं?
CAIIB 2026 मई-जून चक्र 31 मई 2026 से 21 जून 2026 तक ऑनलाइन आयोजित किया जाएगा। पेपर-वार परीक्षा तिथियों का विवरण इस प्रकार है:
| पेपर / विषय | परीक्षा की तारीख |
| Advanced Bank Management (ABM) | 31 मई 2026 |
| Bank Financial Management (BFM) | 7 जून 2026 |
| Advanced Business & Financial Management (ABFM) | 13 जून 2026 |
| Banking Regulations & Business Laws (BRBL) | 14 जून 2026 |
| Elective Paper (Rural Banking / HRM / IT & Digital Banking / Risk Management / Central Banking) | 21 जून 2026 |
इसे भी देखें: CAIIB Exam Date 2026
नवंबर-दिसंबर 2026 CAIIB चक्र के लिए पेपर-वार परीक्षा तिथियां क्या हैं?
CAIIB 2026 नवंबर-दिसंबर चक्र 6 दिसंबर 2026 से 27 दिसंबर 2026 तक ऑनलाइन आयोजित किया जाएगा। पेपर-वार परीक्षा तिथियों का विवरण इस प्रकार है:
| पेपर / विषय | परीक्षा की तारीख |
| Advanced Bank Management (ABM) | 6 दिसंबर 2026 |
| Bank Financial Management (BFM) | 12 दिसंबर 2026 |
| Advanced Business & Financial Management (ABFM) | 13 दिसंबर 2026 |
| Banking Regulations & Business Laws (BRBL) | 20 दिसंबर 2026 |
| Elective Paper (Rural Banking / HRM / IT & Digital Banking / Risk Management / Central Banking) | 27 दिसंबर 2026 |
CAIIB 2026 सिलेबस PDF डाउनलोड करें
यह IIBF CAIIB सिलेबस Advanced Bank Management (ABM), Bank Financial Management (BFM), Advanced Business & Financial Management (ABFM), और Banking Regulations & Business Laws (BRBL) के साथ-साथ जोखिम प्रबंधन, IT और डिजिटल बैंकिंग, और केंद्रीय बैंकिंग जैसे विशिष्ट ऐच्छिक (Electives) को कवर करता है। इस व्यापक पाठ्यक्रम के साथ अपनी CAIIB परीक्षा की तैयारी में आगे रहें। नीचे दिए गए लिंक से आधिकारिक CAIIB सिलेबस PDF प्राप्त करें।
CAIIB सिलेबस फ्री PDF डाउनलोड करें
मुख्य निष्कर्ष (Key Takeaway)
| पहलू | विवरण |
| कुल पेपर | 5 (4 अनिवार्य + पसंद का 1 वैकल्पिक) |
| परीक्षा पैटर्न | 100 प्रश्न, 100 अंक प्रति पेपर, 2 घंटे की अवधि, कोई नकारात्मक अंकन नहीं |
| वैकल्पिक चयन मार्गदर्शन | आसान तैयारी और व्यावहारिक उपयोगिता के लिए नौकरी की भूमिका या करियर लक्ष्यों के आधार पर चुनें |
| कवरेज | कोर बैंकिंग अवधारणाएं, वित्त, प्रबंधन, कानून, प्रौद्योगिकी, जोखिम और केंद्रीय बैंकिंग प्रथाएं |
| अनिवार्य पेपर 1 | Advanced Bank Management (ABM): सांख्यिकी, मानव संसाधन प्रबंधन, क्रेडिट प्रबंधन, अनुपालन और कॉर्पोरेट गवर्नेंस |
| अनिवार्य पेपर 2 | Bank Financial Management (BFM): अंतर्राष्ट्रीय बैंकिंग, जोखिम प्रबंधन, ट्रेजरी प्रबंधन, बैलेंस शीट प्रबंधन |
| अनिवार्य पेपर 3 | Advanced Business & Financial Management (ABFM): प्रबंधन प्रक्रिया, उन्नत वित्तीय प्रबंधन, मूल्यांकन और विलय, उभरते व्यावसायिक समाधान |
| अनिवार्य पेपर 4 | Banking Regulations & Business Laws (BRBL): विनियम और अनुपालन, महत्वपूर्ण अधिनियम और कानूनी पहलू, व्यावसायिक कानून, वाणिज्यिक और अन्य बैंकिंग कानून |
| वैकल्पिक पेपर 1 | Rural Banking: ग्रामीण भारत, ग्रामीण विकास का वित्तपोषण, प्राथमिकता क्षेत्र वित्तपोषण और सरकारी पहल, ग्रामीण बैंकिंग में समस्याएं और संभावनाएं |
| वैकल्पिक पेपर 2 | Human Resource Management (HRM): HRM के मूल सिद्धांत, HR रणनीति बनाना, प्रेरणा और प्रशिक्षण, कार्मिक और औद्योगिक संबंध, उभरते HRM रुझान |
| वैकल्पिक पेपर 3 | IT & Digital Banking: IT का परिचय, सिस्टम और डिज़ाइन, बैंकिंग प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग और डिजिटल बैंकिंग, सूचना प्रणाली सुरक्षा और ऑडिट |
| वैकल्पिक पेपर 4 | Risk Management: जोखिम और जोखिम प्रबंधन ढांचा, क्रेडिट जोखिम, बाजार जोखिम, परिचालन जोखिम, बेसल और RBI दिशानिर्देश, डेरिवेटिव और जोखिम प्रबंधन |
| वैकल्पिक पेपर 5 | Central Banking: केंद्रीय बैंक के कार्य, भारत में RBI, मौद्रिक और ऋण नीतियां, विदेशी मुद्रा और वित्तीय बाजार, विनियमन और वित्तीय स्थिरता, NBFCs और प्राथमिक डीलर |
सामान्य प्रश्न (FAQs)
Q1. 2026 के लिए CAIIB सिलेबस क्या है?
उत्तर: CAIIB 2026 सिलेबस में चार अनिवार्य पेपर (ABM, BFM, ABFM, BRBL) और एक वैकल्पिक पेपर शामिल है जो विभिन्न बैंकिंग और वित्त विषयों को कवर करता है।
Q2. CAIIB में कितने पेपर होते हैं?
उत्तर: इसमें पांच पेपर होते हैं: चार अनिवार्य और एक वैकल्पिक, जिसे उम्मीदवार अपनी रुचि के क्षेत्र के आधार पर चुन सकते हैं।
Q3. क्या CAIIB में कोई नकारात्मक अंकन (Negative Marking) है?
उत्तर: नहीं, इसमें कोई नकारात्मक अंकन नहीं है, इसलिए उम्मीदवारों को सभी प्रश्नों को हल करने का प्रयास करना चाहिए।
Q4. CAIIB परीक्षा के लिए उत्तीर्ण मानदंड (Passing Criteria) क्या है?
उत्तर: उम्मीदवारों को प्रति पेपर 100 में से 50 अंक प्राप्त करने होंगे, या एक ही प्रयास में 50% कुल औसत के साथ प्रति पेपर 45 अंक प्राप्त करने होंगे।
Q5. CAIIB की परीक्षा पद्धति क्या है?
उत्तर: CAIIB परीक्षा ऑनलाइन मोड में आयोजित की जाती है जिसमें प्रति पेपर 100 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) होते हैं।
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नमस्ते, मैं अदिति हूँ। मैं Oliveboard में Content Writer के रूप में कार्यरत हूँ। पिछले 4 वर्षों से मैं परीक्षा से जुड़ी जानकारी को सरल और स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत कर रही हूँ। मेरा उद्देश्य विभिन्न परीक्षाओं के लिए छात्रों को आसान और प्रभावी मार्गदर्शन प्रदान करना है। मैं नोटिफिकेशन, एडमिट कार्ड और परीक्षा से संबंधित अपडेट को सरल शब्दों में समझाती हूँ, साथ ही स्टडी प्लान और विषयवार रणनीतियाँ तैयार करती हूँ। मेरा लक्ष्य है कि कामकाजी पेशेवर अपने नौकरी और परीक्षा तैयारी के बीच संतुलन बना सकें और अपने करियर में आगे बढ़ सकें ।






